Thu. Jun 27th, 2019

The Seer

Read, Think, Act

politics

1 min read

अपराध बनाम राजनीति। अपराध क्या है? राजनीति क्या है? क्या दोनों एक दूसरे के पर्याय…

Advertisements
4 min read

Headache is perhaps the most dangerous weapon of nature against man. No matter how many nuclear weapons you have made, you still have a headache saving them from hackers. No matter how much wealth you have made selling beer in Aidin, you still have a headache of running around in a court of London. In a way, it is a great leveller. It’s almost like nature knew that she would be screwed up by us human, so she put one of her own in our head – an ache.

3 min read

George Orwell had been a lot of things in his life from imperial police to teacher, but he is remembered the best as a writer, novelist and an essayist. Although Orwell did not live past 1950, his works have continued to influence not only his readers and other writers, but also the political culture of all these years. His creations rendered a new adjective to the language – Orwellian indicating a totalitarian regime and a set of whole new terms which continue to be relevant even in the modern societal and political discourses

1 min read

फिल्म डॉन में अमिताभ बच्चन ने दो भूमिकाएँ निभायी हैं। उनमें से पहला किरदार नकारात्मक है। डॉन एक बहुत खतरनाक अपराधी है और उसके ही शब्दों में ११ मुल्कों की पुलिस उसका पीछा कर रहीं होतीं हैं। फिल्म शोले में जय और वीरू टुच्चे चोर हैं। फिल्म डर में शाहरुख़ खान ने एक बेहद संगीन और जुनूनी आशिक़ का किरदार निभाया है। फिल्म स्पेशल छब्बीस में अक्षय कुमार ने एक ठग का किरदार निभाया।

1 min read

पर मैं यहाँ उनकी बात नहीं करूँगा। मैं बात करूँगा आम आदमी की – तथाकथित आम आदमी। मेरे मत से तो आम आदमी कोई नहीं होता। आदमी होते हैं, औरतें होतीं हैं। गरीब आदमी, अमीर आदमी। गरीब औरत, अमीर औरत। आम तो उस फल का नाम है जो गरीब आदमी की नसीब में नहीं लिखा होता। अच्छा छोड़िये इन बातों को, अभी के लिए आम आदमी ही कह लीजिये। तो बात कुछ यूँ हुई कि जहाँ कहीं भी गया आम लोगों के साथ ही रहा । आम आदमी जो अच्छे भी हैं, बुरे भी और फिर जो इन दोनों में से कुछ नहीं या फिर दोनों ही। इन सबने किसी ना किसी तरीके से कुछ ऐसा कहा है कि मैंने इनको याद रक्खा है। कुछेक आप भी पढ़ लें। कोई भी बात निर्णयात्मक नहीं है। मेरे ख्याल में ये बातें उन लोगों ने कहीं हैं जो अपने दिल से ईमानदार थे और इन्हें व्यवहार कुशलता की कोई चिंता नहीं थी। मानव सीमाओं से घिरा है, हम आप और सब।