Thu. Jun 27th, 2019

The Seer

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religion

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An India Today article quotes from the autobiography of Kuldip Nayar Beyond the lines: An…

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While the world outside of me was absorbed in the songs and mantra chanting, my mind was busy weaving a web of questions, answers, analogies, and conclusions. Does God exist? Does Shiva exist? Who are these people worshipping? I observed both sides of the world – The God side and the Devotee side. I saw no difference. There never existed two worlds. It was one.

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पर मैं यहाँ उनकी बात नहीं करूँगा। मैं बात करूँगा आम आदमी की – तथाकथित आम आदमी। मेरे मत से तो आम आदमी कोई नहीं होता। आदमी होते हैं, औरतें होतीं हैं। गरीब आदमी, अमीर आदमी। गरीब औरत, अमीर औरत। आम तो उस फल का नाम है जो गरीब आदमी की नसीब में नहीं लिखा होता। अच्छा छोड़िये इन बातों को, अभी के लिए आम आदमी ही कह लीजिये। तो बात कुछ यूँ हुई कि जहाँ कहीं भी गया आम लोगों के साथ ही रहा । आम आदमी जो अच्छे भी हैं, बुरे भी और फिर जो इन दोनों में से कुछ नहीं या फिर दोनों ही। इन सबने किसी ना किसी तरीके से कुछ ऐसा कहा है कि मैंने इनको याद रक्खा है। कुछेक आप भी पढ़ लें। कोई भी बात निर्णयात्मक नहीं है। मेरे ख्याल में ये बातें उन लोगों ने कहीं हैं जो अपने दिल से ईमानदार थे और इन्हें व्यवहार कुशलता की कोई चिंता नहीं थी। मानव सीमाओं से घिरा है, हम आप और सब।