उलझते बंधन – Rakshabandhan Special

करीब १२-१३ बरस का था। नए पड़ोसी आये थे उस दिन। माँ ने मुझे उनकी मदद करने के लिए भेजा। एक ट्रक भर कर सामान था। काफी चीज़ें थीं। घर में उनके बस सिन्हा अंकल खुद, उनकी पत्नी और उनकी बेटी थी। आंटी और बेटी तो अंदर बैठ गए, सो मैंने और अंकल ने मिलकर सारा सामान उतारा और अंदर रखा। थालियाँ, चम्मच, मिक्सर ग्राइंडर – मुझसे तो यही उठ रहे थे। करीब तीन से चार घंटों में ये काम पूरा हुआ। अंकल ने अंदर आकर बैठने को कहा। यही सोचकर कि कुछ खाने पीने को मिलेगा, मैं अंदर बैठ गया।

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Echoes that stay!

I broke a promise I made to myself, a promise I had kept for 9 long  years. I was not going to read another of Khaled Hosseini’s books after the heart-wrenching story of the Kite runner although I loved every bit of it.  I did duly skip A Thousand Splendid Suns and stayed true to the promise, until a friend, unaware of this promise of mine gifted me Hosseni’s latest bestseller And the Mountains Echoed. So I made my choice, picked the book to read during a bus journey in the night and here is how beautifully Hosseini opens the book for me.
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